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Quran 2:255آيَةُ الْكُرْسِيِّ When to recite it
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हर फ़ज़ीलत हदीस के हवाले और दर्जे के साथ

आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत

सहीह हदीसों में आयतुल कुर्सी की पाँच फ़ज़ीलतें आई हैं: यह क़ुरआन की सबसे अज़ीम आयत है, सोने से पहले पढ़ने पर सुबह तक हिफ़ाज़त, हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ने पर जन्नत, सुबह-शाम पढ़ने पर अगले वक़्त तक हिफ़ाज़त, और इसमें अल-हय्युल क़य्यूम है, जिसे इस्मे आज़म कहा गया है।
सहीह फ़ज़ीलतें
5
सबसे अज़ीम आयत
मुस्लिम 810
सोने से पहले
बुख़ारी 2311
नमाज़ के बाद
नसाई
तय गिनती
कोई सहीह नहीं

आयतुल कुर्सी की सहीह फ़ज़ीलतें

हर फ़ज़ीलत के साथ पूरी हदीस का मतलब, उसका नंबर और हदीस के उलमा का दिया हुआ दर्जा, ताकि आप भरोसे से आगे भेज सकें।
All 16 narrations (English) →
  1. 1

    क़ुरआन की सबसे अज़ीम (महान) आयत

    नबी ﷺ ने उबय्य बिन काब रज़ियल्लाहु अन्हु से पूछा: “अबुल-मुंज़िर, क्या तुम जानते हो कि अल्लाह की किताब की कौन-सी आयत, जो तुम्हारे पास है, सबसे अज़ीम है?” उन्होंने कहा: अल्लाहु ला इला-ह इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम। आप ﷺ ने उनके सीने पर हाथ मारा और फ़रमाया: “अबुल-मुंज़िर, तुम्हें इल्म मुबारक हो।”
    सहीहसहीह मुस्लिम 810sunnah.com पर पढ़ें ↗
  2. 2

    सोने से पहले पढ़ने पर सुबह तक हिफ़ाज़त

    अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु रमज़ान की ज़कात की निगरानी कर रहे थे। तीन रातों तक एक चोर आया। तीसरी रात उसने कहा: “जब बिस्तर पर जाओ तो आयतुल कुर्सी पढ़ लो, अल्लाह की तरफ़ से एक निगहबान तुम पर रहेगा और सुबह तक कोई शैतान तुम्हारे पास नहीं आएगा।” नबी ﷺ ने फ़रमाया: “उसने सच कहा, हालाँकि वह बहुत झूठा है। वह शैतान था।”
    सहीहसहीह बुख़ारी 2311sunnah.com पर पढ़ें ↗
  3. 3

    हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ने पर जन्नत

    नबी ﷺ ने फ़रमाया: “जो हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़े, उसे जन्नत में दाख़िल होने से मौत के सिवा कोई चीज़ नहीं रोकती।”
    सहीह (इब्ने हिब्बान, अलबानी)नसाई, अस-सुनन अल-कुबरा 9848
  4. 4

    सुबह पढ़ें तो शाम तक, शाम को पढ़ें तो सुबह तक हिफ़ाज़त

    उबय्य बिन काब रज़ियल्लाहु अन्हु की खजूरें कम हो रही थीं। रात को उन्हें एक जिन्न मिला। उन्होंने पूछा कि तुमसे कौन-सी चीज़ बचाती है। उसने कहा: आयतुल कुर्सी; जो शाम को पढ़े वह सुबह तक हमसे महफ़ूज़ रहता है, और जो सुबह पढ़े वह शाम तक। नबी ﷺ ने फ़रमाया: “उस ख़बीस ने सच कहा।”
    सहीह (अलबानी, सहीह अत-तरग़ीब)मुस्तदरक हाकिम, तबरानी
  5. 5

    इसमें अल्लाह का इस्मे आज़म (सबसे बड़ा नाम) है

    नबी ﷺ ने फ़रमाया: “अल्लाह का इस्मे आज़म, जिससे दुआ की जाए तो वह क़बूल करता है, तीन सूरतों में है: अल-बक़रा, आले इमरान और ताहा।” उलमा कहते हैं कि यह अल-हय्युल क़य्यूम है, जो आयतुल कुर्सी (2:255), आले इमरान (3:2) और ताहा (20:111) तीनों में आता है।
    हसनसुनन इब्ने माजा 3856sunnah.com पर पढ़ें ↗

आयतुल कुर्सी सबसे अज़ीम आयत क्यों है?

क्योंकि पूरी आयत अल्लाह के बारे में है। इसकी पाँच बड़ी बातें:
पूरा तर्जुमा →
  1. तौहीद से शुरू होती है अल्लाहु ला इला-ह इल्ला हु-व: अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। पूरे दीन की बुनियाद यही है।
  2. अल्लाह के दो बड़े नाम अल-हय्यु (हमेशा ज़िंदा) और अल-क़य्यूम (सबको थामने वाला)। बाक़ी सब सिफ़ात इन्हीं दोनों में आ जाती हैं।
  3. न ऊँघ, न नींद जो सबको सँभाले हुए है, वह एक पल को भी ग़ाफ़िल नहीं होता। इसी लिए इसे पढ़कर सोने वाला महफ़ूज़ रहता है।
  4. सब कुछ उसी का आसमान और ज़मीन में जो कुछ है, उसकी मिल्कियत है, और उसकी इजाज़त के बिना कोई सिफ़ारिश भी नहीं कर सकता।
  5. उसका इल्म और उसकी कुर्सी वह आगे-पीछे सब जानता है, उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर छाई है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे नहीं थकाती।

आयतुल कुर्सी 41, 100, 313 या 1000 बार पढ़ने की फ़ज़ीलत

यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है, तो साफ़ जवाब: किसी सहीह हदीस में आयतुल कुर्सी को तय गिनती में पढ़ने की कोई ख़ास फ़ज़ीलत नहीं आई। क़ुरआन पढ़ने का सवाब हमेशा है, आप जितनी बार चाहें पढ़ें, लेकिन 41, 313 या 1000 बार से जुड़े वादे नबी ﷺ से साबित नहीं।
कितनी बारहदीस क्या कहती है
7 या 11 बारकिसी सहीह हदीस में नहीं।
21, 41 या 70 बारकिसी सहीह हदीस में नहीं।
100 बारकिसी सहीह हदीस में नहीं।
313 बारकिसी सहीह हदीस में नहीं। 313 जंगे बद्र के सहाबा की गिनती है, इस आयत के लिए बताई गई गिनती नहीं।
786 बारकिसी सहीह हदीस में नहीं। 786 हुरूफ़ के नंबर (अबजद) से बना है, सुन्नत से नहीं।
1000 बार, या 40 दिन तककिसी सहीह हदीस में नहीं।
सहीह यह है: हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद एक बार, सोने से पहले एक बार, और सुबह-शाम एक बार। ज़्यादा बार पढ़ना हो तो हमारा रिपीट प्लेयर और काउंटर गिनती रखता है।
इन बातों से बचें
ये बातें इंटरनेट और WhatsApp पर बहुत फैली हैं, लेकिन किसी सहीह हदीस में नहीं हैं:
  • जिसे चाहें उससे शादी के लिए 313 बार पढ़ना
  • रिज़्क़ के दरवाज़े खुलने के लिए 1000 बार पढ़ना
  • क़र्ज़ उतारने के लिए 70 बार पढ़ना
  • ख़्वाब में किसी को देखने के लिए सोने से पहले 7 बार पढ़ना
  • 786 बार पढ़ने की कोई ख़ास फ़ज़ीलत

आयतुल कुर्सी कब पढ़ें

सुन्नत में बताए गए वक़्त।
सुनें और याद करें →
हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद
नबी ﷺ ने फ़रमाया: जो हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़े, उसे जन्नत में जाने से सिर्फ़ मौत रोके हुए है। सलाम फेरने के बाद एक बार, धीमी आवाज़ में पढ़ें।
नसाई, अस-सुनन अल-कुबरा 9848
सोने से पहले
जो बिस्तर पर जाते वक़्त आयतुल कुर्सी पढ़े, उस पर सुबह तक अल्लाह की तरफ़ से एक निगहबान रहता है और शैतान उसके पास नहीं आता।
सहीह बुख़ारी 2311
सुबह और शाम
बहुत से उलमा ने आयतुल कुर्सी को सुबह-शाम के अज़कार में शामिल किया है, ताकि यह रोज़ की हिफ़ाज़त बन जाए।
रोज़ाना के अज़कार
डर या घबराहट के वक़्त
आयतुल कुर्सी याद दिलाती है कि अल्लाह कभी नहीं सोता और कोई चीज़ उसकी निगरानी से बाहर नहीं। “सुन लो, अल्लाह की याद से ही दिलों को सुकून मिलता है।”
क़ुरआन 13:28

आयतुल कुर्सी के बारे में कमज़ोर (ज़ईफ़) रिवायतें

ये मशहूर किताबों में हैं, लेकिन इनकी सनद कमज़ोर है, इसलिए इनसे कोई अमल तय नहीं किया जाता। पहली रिवायत का मतलब ऊपर वाली सुबह-शाम की सहीह हदीस से साबित है।
More weak reports (English) →
  • "जो सुबह को हा-मीम अल-मोमिन (40:1-3) और आयतुल कुर्सी पढ़े, शाम तक उसकी हिफ़ाज़त होगी।"
    ज़ईफ़ (कमज़ोर)जामे तिर्मिज़ी 2879sunnah.com ↗
  • "हर चीज़ की एक चोटी है और क़ुरआन की चोटी सूरह बक़रा है; उसमें एक आयत क़ुरआन की आयतों की सरदार है: आयतुल कुर्सी।"
    ज़ईफ़ (कमज़ोर)जामे तिर्मिज़ी 2878sunnah.com ↗

आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत से जुड़े सवाल

आयतुल कुर्सी पढ़ने के क्या फ़ायदे हैं?
सहीह हदीसों में पाँच फ़ायदे आए हैं: यह क़ुरआन की सबसे अज़ीम आयत है; सोने से पहले पढ़ने पर सुबह तक अल्लाह की तरफ़ से निगहबान रहता है; हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ना जन्नत का रास्ता है; सुबह-शाम पढ़ने पर अगले वक़्त तक हिफ़ाज़त; और इसमें अल-हय्युल क़य्यूम है, जिसे इस्मे आज़म से जोड़ा गया है।
आयतुल कुर्सी कितनी बार पढ़नी चाहिए?
सुन्नत में एक-एक बार: हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद, सोने से पहले, और सुबह-शाम। 7, 41, 100, 313 या 1000 बार की कोई ख़ास फ़ज़ीलत सहीह हदीस में नहीं। ज़्यादा पढ़ना चाहें तो सवाब की नीयत से पढ़ें, किसी तय वादे की उम्मीद पर नहीं।
आयतुल कुर्सी 313 बार पढ़ने से क्या होता है?
313 बार की कोई सहीह हदीस नहीं है। शादी, दौलत या मुराद पूरी होने के जो वादे इसके साथ बताए जाते हैं, वे नबी ﷺ से साबित नहीं।
घर में आयतुल कुर्सी पढ़ने का क्या फ़ायदा है?
घर के लिए ख़ास तौर पर सूरह बक़रा की फ़ज़ीलत आई है: जिस घर में सूरह बक़रा पढ़ी जाए, शैतान वहाँ से भागता है (सहीह मुस्लिम 780), और आयतुल कुर्सी उसी सूरह की आयत है। घर में सोने से पहले सब घरवाले आयतुल कुर्सी पढ़ें, यह सुन्नत के मुताबिक़ है।
क्या आयतुल कुर्सी नज़र और जादू से बचाती है?
सहीह बुख़ारी 2311 में शैतान से हिफ़ाज़त का ज़िक्र है, इसलिए उलमा इसे रुक़्या (दम) में पढ़ते हैं, साथ में सूरह फ़लक़ और सूरह नास। हिफ़ाज़त और शिफ़ा अल्लाह की तरफ़ से है; आयत पढ़ना दुआ और ज़िक्र है, कोई मंतर नहीं।
क्या आयतुल कुर्सी से जिन्न भागते हैं?
दोनों सहीह रिवायतों (बुख़ारी 2311 और उबय्य बिन काब वाली रिवायत) में ख़ुद जिन्न और शैतान ने माना कि आयतुल कुर्सी पढ़ने वाले के पास वे नहीं आ सकते, और नबी ﷺ ने इसकी तस्दीक़ की।
क़र्ज़, रिज़्क़ या शादी के लिए आयतुल कुर्सी पढ़ सकते हैं?
किसी सहीह हदीस में आयतुल कुर्सी को क़र्ज़, रिज़्क़ या शादी से नहीं जोड़ा गया। आयतुल कुर्सी पढ़ें क्योंकि यह इबादत है, और अपनी ज़रूरत के लिए अल्लाह से सीधे दुआ करें। क़र्ज़ के लिए नबी ﷺ की सिखाई दुआएँ अलग से मौजूद हैं।
क्या बीमारी में आयतुल कुर्सी पढ़कर दम कर सकते हैं?
हाँ। क़ुरआन की आयतें पढ़कर दम करना जायज़ है, शर्त यह है कि उसमें कोई शिर्क न हो (सहीह मुस्लिम 2200)। आयतुल कुर्सी, सूरह फ़ातिहा और आख़िरी तीन क़ुल पढ़कर हाथों पर फूँकें और बदन पर फेरें, और साथ में इलाज भी कराएँ।
क्या बिना वुज़ू आयतुल कुर्सी पढ़ सकते हैं?
ज़बानी (याद से) पढ़ने के लिए वुज़ू ज़रूरी नहीं, इस पर उलमा का इत्तेफ़ाक़ है। मुसहफ़ (छपा हुआ क़ुरआन) छूने के लिए ज़्यादातर उलमा वुज़ू ज़रूरी कहते हैं। हैज़ (पीरियड) में बहुत से उलमा इसे हिफ़ाज़त की दुआ और ज़िक्र की नीयत से पढ़ने की इजाज़त देते हैं।
आयतुल कुर्सी इतनी ताक़तवर क्यों है?
इसकी बातों की वजह से: एक आयत में अल्लाह की तौहीद, उसकी हमेशा की ज़िंदगी, सबको थामे रखना, उसका इल्म, उसकी कुर्सी और उसकी अज़मत, सब बयान है। इसी लिए नबी ﷺ ने इसे सबसे अज़ीम आयत कहा। हर हिस्से का मतलब हिंदी तर्जुमा में पढ़ें।

याद कर लें, ताकि हर रात पढ़ सकें

संपादक: ज़ाकिर मोहम्मद
हर हदीस उसकी किताब और नंबर के साथ है, और दर्जा उन उलमा का है जिनका नाम साथ लिखा है। तिर्मिज़ी और इब्ने माजा की रिवायतों के दर्जे 5 नवंबर 2026 को sunnah.com पर जाँचे गए। हदीसों का हिंदी मतलब इसी साइट का अपना है।